Nari World Oct/17/2018 6:15 PM (38) (3483)

शक्ति: राजनीति और सबरीमाला मन्दिर पर स्त्री शक्ति का असर

एक ओर सम्पूर्ण देश मां भगवती की अष्ठमी पूजा में तल्लीन था, तो दूसरी ओर महिलाओं से जुड़े दो मुद्दे सुर्खियों में रहे।

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डीआईवा नेटवर्क ||नई दिल्ली

शारदीय नवरात्रों की दुर्गाष्ठमी का दिन वाकई कई मायनों में कभी नही भुलाया जा सकेगा। एक ओर सम्पूर्ण देश मां भगवती की अष्ठमी पूजा में तल्लीन था, तो दूसरी ओर महिलाओं से जुड़े दो मुद्दे सुर्खियों में रहे। पहला मामला था केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर तो दूसरा मामला राजनीतिक था, लेकिन उसके केंद्र में भी स्त्रीशक्ति थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अय्यप्पा मंदिर में महिला प्रवेश की अनुमति दिए जाने के बाद दुर्गाष्ठमी को केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर के कपाट खोले गए। हजारों की तादाद में महिलाएं दर्शन के लिए कतारों में थीं। वहीं उन्हें रोकने वालों की फौज भी कम नहीं थी। महिलाओं को रोकने में महिलाएं भी पुरुषो से बिलकुल भी पीछे नहीं हट रही थीं। बता दें कि सबरीमाला मंदिर में रजस्वला लड़कियों और महिलाओं के प्रवेश का महिलाएं ही विरोध कर रही हैं। इसको लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है, जिसको देखते हुए प्रशासन ने भी पूरी तैयारी की हुई है। मंदिर के आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। सबरीमाला मंदिर जाने वाले रास्ते पर लाठी चार्ज किया गया है। बावजूद इसके सबरीमाला मन्दिर के कपाट भारी विरोध प्रदर्शन के बीच दर्शन को खोले गये.
वहीँ दूसरी ओर, #MeToo  कैम्पेन का असर भी काफी जोरो पर था जिसके नतीजतन, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर को अपने पद से इस्तीफा देना उचित लगा। हालांकि उनके त्यागपत्र का कयास गत एक सप्ताह से लगाया जा रहा था। डेढ़ दर्जन से अधिक महिलाओं ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं इस कैम्पेन के चलते विपक्ष भी लगातार उन पर दवाब बना रहा था। भाजपा सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में पहली बार किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया है।

बता दें कि यह एक विश्वव्यापी अभियान है जिसके तहत महिलाएं अपने साथ हुए अशालीन,  अशोभनीय उत्पीड़न का खुलासा कर रही हैं। इस अभियान के तहत नारीशक्ति की एकता और अखंडता का स्वरूप देखने को मिला. दिनभर की सुर्खियों में महिलाओं से जुड़े दोनो ही मुद्दे नारी सशक्ति और शक्ति का परिचायक हैं

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