Business National Oct/30/2019 09:48 am (38) (3483)

कर स्लैब समेत कई बड़े एलान की तैयारी में सरकार,पीएमओ और वित्त मंत्रालय आए साथ

दिवाली के बाद सरकार शेयर बाजारों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है |

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अमर उजाला||नई दिल्ली

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और वित्त मंत्रालय लाभांश वितरण कर खत्म करने जैसे कई उपायों पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा मौजूदा कर स्लैब व दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी), अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (एसटीसीजी) की अवधि और प्रतिभूति हस्तांतरण कर (एसटीटी) की समीक्षा भी की जा रही है।

इस संबंध में पीएमओ के साथ वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) और राजस्व विभाग की बैठक भी हो चुकी है। सरकार 2018 के बजट में एक दशक से ज्यादा वक्त के बाद फिर से एलटीसीजी को लाई थी, जिसमें एक लाख रुपये से ज्यादा धनराशि पर 10 फीसदी कर का प्रावधान था। सरकार इसकी भी समीक्षा कर सकती है, जिसमें एक खास होल्डिंग अवधि के बाद कर की देनदारी को खत्म किया जा सकता है।

 

एक साल से कम अवधि पर शेयर रखने पर 15 फीसदी की दर से अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर वसूला जाता है। इस श्रेणी की पूंजीगत संपदाओं में सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर, ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) और इक्विटी केंद्रित म्यूचुअल फंड शामिल हैं। वहीं शेयरों सहित प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री पर एसटीटी वसूला जाता है। बाजार एसटीटी में कमी या इसे खत्म करने की मांग करता आ रहा है। 

 

विश्लेषकों के मुताबिक, डीडीटी की खामियों को दूर करने के लिए सरकार ने शेयर पुनर्खरीद पर 20 फीसदी कर लगाने का एलान किया था और इससे निवेशकों की चिंताएं खासी बढ़ गई थीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल आम बजट में इस नए प्रावधान का एलान किया था।

 

इसका उद्देश्य डीडीटी से बचने के लिए शेयर पुनर्खरीद पेशकश लाने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसना था। बजट में सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा शेयर पुनर्खरीद पर 20 फीसदी अतिरिक्त कर का प्रस्ताव किया गया था। बजट के बाद शेयर में बिकवाली की एक बड़ी वजह यह भी था। इसके चलते सैकड़ों कंपनियों की शेयर पुनर्खरीद योजनाएं अटक गई थीं और तब से कोई पुनर्खरीद नहीं हुई। 

 

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