Religion Oct/18/2018 3:00 PM (38) (3483)

अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है दशहरा

आश्विन महीने की दशमी तिथि को दशहरा का त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र पूजा की शुरुआत भगवान राम ने ही की थी।

post

डीआईवा नेटवर्क ||नई दिल्ली

दशहरा हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने माता सीता को राजा रावण की सोने की नगरी ‘लंका’ से मुक्त कराया था. माँ सीता को राजा रावण के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के साथ- साथ इस संसार को भी रावण के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। नवरात्र के बाद आने वाले इस पर्व को देशभर में बडे ही जोरशोर के साथ मनाया जाता है। जगह-जगह धर्मिक रामलीलाएं आयोजित की जाती हैं तथा बुराई के प्रतीक रावण के पुतले जलाए जाते हैं। इस साल नवरात्र 18 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है। 18 अक्टूबर को ही दोपहर साढ़े 3 बजे से दशमी लग जाएगी.

शारदीय नवरात्र मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की अराधना का पर्व है। इसके ठीक बाद यानी कि आश्विन महीने की दशमी तिथि को दशहरा का त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र पूजा की शुरुआत भगवान राम ने ही की थी। लंका पर कूच करने से पहले सागर किनारे श्रीराम ने मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की 9 दिनों तक वंदना की। इसके बाद उन्होंने लंका पर चढ़ाई कर दशानन का वध किया था। जिस दिन उन्होंने रावण का वध किया वह आश्विन महीने की दशमी तिथि थी। तभी से दशहरा मनाने की शुरुआत हुई थी। दशहरा को अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है।

post
post
post
post
post
post
post
post
post
post
post
post
post
post
post
post